भुलाए से नहीं भूलती, वो तेरी बेरुखी की शाम
लबों पे ठहर जाता है, अचानक फिर वही इक नाम
बेदर्दी सनम तुझको, मेरा मन याद करता है
बरसता है जो पलकों से वो सावन याद करता है...
| Bedardi Sanam Tujhko Mera Man |
वो गलियां सर्द शामों की, जहां हम साथ चलते थे
दिलों की धूप में मिलकर, जहां मौसम बदलते थे
अब उन वीरान राहों पर, हवा खामोश चलती है
तेरी आहट को तरसा वो, हर इक मंज़र पुकारता है
बेदर्दी सनम तुझको मेरा मन याद करता है
कभी जो छू के गुज़रे तो, लगे तू आस-पास ही है
हवा के हर तराने में, तेरी आवाज़ की प्यास ही है
न जाने किस ख़ता पे तू, ख़फ़ा होकर चला आया
कि तुझसे मिलने को अब तो, मेरा हर पल तड़पता है
बेदर्दी सनम तुझको मेरा मन याद करता है
वही ठहरा हुआ दरिया, वही खामोश साहिल है
जिसे तू छोड़ आया था, वही बिखरी ये महफ़िल है
तेरी यादों के आईने, कभी धुंधले नहीं होते
गए थे तोड़कर जिसको, वो बंधन याद करता है
बेदर्दी सनम तुझको मेरा मन याद करता है
बरसता है जो पलकों से वो सावन याद करता है...
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