Jane Kahan Gaye Wo Pal


New version[मुखड़ा]

जाने कहाँ गए वो पाल

कहते थे, "तेरी याद में पलकों को हम बिछाएँगे"

जाने कहाँ गए वो पाल

कहते थे, "तेरी याद में पलकों को हम बिछाएँगे"

चाहे कहीं भी तुम रहो, तुमको ना भूल पाएँगे

जाने कहाँ गए वो पाल...


हाथों में हाथ थाम कर, खाई थीं कसमें प्यार की

वीरान कर गई हमें, रुत वो फ़रेब-ए-यार की

जिस राह से गुज़रे कभी, खुशबू वहाँ बिखरी रही

अब धूल है उस मोड़ पर, हर एक आरज़ू मिटी

सपनों के वो महल सभी, पल में धुआँ बना गए

तुमको ना भूल पाएँगे

जाने कहाँ गए वो पाल...

[अंतरा 2]

मौसम वही, रँग भी वही, बस वो मुलाक़ातें नहीं

आँखों में आँसू रह गए, होठों पे वो बातें नहीं

तन्हाइयों की धूप में, झुलस रहा है ये बदन

सहरा बना के छोड़ दी, महकी हुई वो अंजुमन

मौसम जो मुस्कुराए थे, अब अश्क़ ही बहाएँगे

तुमको ना भूल पाएँगे

जाने कहाँ गए वो पाल...

[अंतरा 3]

वादा वफ़ा का था मगर, दस्तूर दुनिया का चुना

दिल की सदा के सामने, तूने ज़माने को सुना

हम तो वहीं खड़े रहे, जहाँ छोड़ कर गए थे तुम

दुनिया से बेख़बर हुए, तेरी ही यादों में हैं गुम

साँसों की डोरी टूटने तक, ये रस्म हम निभाएँगे

तुमको ना भूल पाएँगे

[आख़िरी बंद / समेट]

जाने कहाँ गए वो पाल

कहते थे, "तेरी राह में नज़रों को हम बिछाएँगे"

चाहे कहीं भी तुम रहो, चाहेंगे तुमको उम्र-भर

तुमको ना 

भूल पाएँगे

जाने कहाँ गए वो पाल...


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